Thursday, September 13, 2018

Bishop Franco Mulakkal - बलात्कारी पादरी

आजकल Bishop Franco Mulakkal की भोत चर्चा है ........ ये सिरिमान जी हमारे हियाँ जालंधर के Bishop हैं । जालंधर Diocese के Bishop ........ अब ये Diocese क्या है और Bishop क्या है इसको पूरा समझने के लिए तो 3 महीने का कोर्स करना पड़ जायेगा ।
पर फिलहाल इतना समझ लीजे कि जैसे इस्लाम मे 72 फिरके हैं , शिया सुन्नी का झगड़ा है उसी तरह ईसाइयत में भी 72 ठो फिरके हैं ......... पर सुन्नी इस्लाम की तरह इनमे जो main फिरका है वो है Roman Catholic ........
इसका HQ है Vatican जिसे बाकायदे एक संप्रभु राष्ट्र बोले तो Sovereign State का दर्जा प्राप्त है ......... संप्रभु राष्ट्र मने वो आज़ाद मुल्क जिसकी अपनी अलग सरकार हो , अलग संविधान हो और अलग कानून ........ इसका प्रमुख Pope होता है और ये जब कभी किसी बिदेसी मुल्क में जाता है तो इसे एक राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा मिलता है और वही protocol होता है ......... मने जो protocol US president ट्रम्प का होगा वही पोप का होगा ..........

तो इस Roman Catholic चर्च की पूरी एक सत्ता है ......... दुनिया के हर मुल्क में जितनी भी Catholic चर्च हैं सभी Vatican के आधीन हैं , वहीं से govern होती हैं .......... जैसे हमारे देश मे प्रशासनिक इकाई राज्य , जिले , तहसील , ब्लॉक और फिर न्याय पंचायत ,और अंत मे गांव है उसी तरह इस Catholic चर्च का भी एक प्रशासन है ......... उसमे एक देश मे पहले ArchDiocese फिर Diocese इत्यादि इलाके होते हैं । उसी तरह दिल्ली Archdiocese की जालंधर Diocese के Bishop हैं Franco Mulakkal .
इसको अगर और ज़्यादा आसान भाषा मे समझाया जाए तो ये कुछ कुछ ( पूरी तरह नही )हमारे शंकराचार्य , मंडलेश्वर , महामंडलेश्वर टाइप मामला है ।

तो इस Roman Catholic चर्च का मामला ये है कि इसमें जो Priest यानि पादरी होता है उसके लिये ये शर्त है कि वो आजीवन कुंवारा रहेगा ........ इनके हियाँ पादरी बनने की पूरी पढ़ाई है , बाकायदे Exam होता है Degree मिलती है । Theological Studies बोलते हैं उसे । और जैसे हमारे यहां गुरुकुल वेद उपनिषद और व्याकरण पढ़ाते हैं वैसे ही इनके यहां Seminary होती है जो Theology पढ़ाती है । उससे जो पढ़ के निकलते हैं उनको सबसे पहले दूरदराज के गांवों में चर्च में नियुक्ति मिलती है और फिर धीरे धीरे प्रमोशन मिलता रहता है ।
तो बचपन मे जब बच्चा Theology पढ़ने आता है तो उससे 12 साल की उम्र में ये एक शपथ पत्र भरवाते हैं , ये कि मैं पादरी बनना चायेता हूँ और ये कि मैं सारी जिंदगी कुंवारा / ब्रह्मचारी रहूंगा ।
बस यहीं से भसड़ शुरू हो जाती है और सारी गंदगी की जड़ यही है ......... अब बात ये है कि इन्ही की एक शाखा है Protestants ........ वो भी यही कहते हैं कि सारे फसाद की जड़ यही नियम है ........ कुंवारा रहूंगा ।
वो कहते हैं कि अबे 12 साल के बच्चे से शपथ लेते हो कि आजन्म ब्रह्मचारी रहूंगा ।
अबे 12 साल का बच्चा जानता भी है कि ब्रह्मचर्य है क्या ?????? ये मेरे से किस कागज़ पे Sign करा रिये हैं ??????? अबे कराना है तो 25 साल के लौंडे से कराओ sign . भराओ फारम । वो जानता है कि सारी जिनगी बिरमचारी रहने का क्या मतलब होता है ।

वो बेचारा Sign करके Seminary में पढ़ने लगता है । उसको भी पढ़ लिख के कुछ ( पादरी ) बनना है । कुछ साल में जवान होता है , तब उसे अहसास होता है कि भेंचो , जे तो भसड़ हो गयी अपनी जिनगी में ......... फिर पढ़ लिख के कहीं पादरी बन गया ......... अब सादी बियाह कर नही सकता ........ आखिर कितने दिन हाथ से काम चलाये ........ नौकरानी चर्च में रख नही सकता ........ सो नौकर रख लेता है ........ दुनिया की किसी Catholic चर्च में चले जाओ 20 साल से कम उम्र का नौकर मिलेगा ।
सिर्फ इतना ही नही , जैसे priests होते हैं वैसे ही Nuns में है ........ वहां भी यही है ........ आजीवन कुंवारा रहने की शर्त ........ 12 साल की उम्र में शपथ पत्र ........ अब जब ये priest promotion पा के कुछ बड़ा ओहदा पा जाते हैं तो कुछ Bishop इत्यादि बन जाते हैं तो पैसा , Power आ जाती है , एक इलाके की बादशाहत मिल जाती है ........ उस इलाके के Convents की Nuns मिल जाती हैं हाथ साफ करने को ..........

Sex Starved बंदे की एक समस्या होती है ........ जैसे सावन के अंधे को सिर्फ हरा दिखता है उसी तरह Sex Starved बंदे को सिर्फ चू* दिखती है .......... आज Catholic ईसाइयत की ये सबसे बड़ी समस्या है .......... इसमें अंदर अंदर इतना भयंकर Sexual Anarchy है जिसकी आप कल्पना नही कर सकते । यदा कदा इनकी गंदगी बाहर आती रहती है पर Vatican का प्रभाव इतना ज्यादा है , पूरा विश्व का मीडिया इनका जरखरीद गुलाम कि इनके खिलाफ किसी की हिम्मत नही की लिख दे ।

मैं भी लिख तो रहा हूँ पर ये समझ लो कि आज ये id कुर्बान होगी ।

सो ये जालंधर के bishop के खिलाफ जो शिकायत है ये तो कुछ भी नही ।

जैसे योगी जी ने प्रदेश के प्रत्येक महिला और बाल गृह की जांच के आदेश दिए हैं वैसे ही अगर हर पादरी और हर चर्च और हर Convent की अगर जांच कराई जाए तो दुनिया का सबसे बड़ा sex Scandal निकल के आएगा जिसमे लाखों नही बल्कि करोड़ों बच्चों , किशोरों और महिलाओं के विभत्स यौन शोषण की कहानियां निकल के आएंगी ।

फेसबुक से कापी किया है

Thursday, May 7, 2015

पुण्य प्रसून बाजपेयी , काश्मीर काश्मीर और जोर से चिल्लाईये

आप जब यासीन मलिक के साथ टीम बनाकर आये थे तभी से मैं प्रतीक्षा कर रहा था कि काश्मीर काश्मीर पहले कौन चिल्लाता है. सोचा था कि यह पहल यासीन मलिक की ओर से होगी लेकिन यासीन मलिक ने तो अपना ब्लाग मिटाना बेहतर समझा।

जब यासीन मलिक भाग खड़ा हुआ सो रह गये आप अकेले तो मेरा विश्वास था कि अब आप ही काश्मीर काश्मीर ही चिल्लायेंगे। आपके पिछले तीनों लेख काश्मीर को लेकर हैं, देखिये मेरा विश्वास कितना सही निकला


काश्मीरी की आजादी के राग पर पिछले सप्ताह प्रभाष जोशी जी ने जनसत्ता में "लल्लू लिबरलों" के आजादी राग पर कागद कारें में एक लेख लिखा था जिसे मैंने नीचे दिये तीन भागों में प्रस्तुत किया था.

मुसलिम बहुल काश्मीर भारत में नहीं रह सकता तो हिन्दू बहुल भारत में मुसलमान क्यों रह सकते हैं?

हमें सत्ता से बाहर बैठाओगे तो हम अलगाववादी और भारत और हिंदू विरोधी आग लगाएंगे ताकि भड़का कर वोट ले सकें।

भारत नामक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य हमने इसीलिए बनाया था। जय हो भारत भाग्य विधाता!

आप शायद उस समय यासीन मलिक के साथ गुफ्तगू में मशगूल होंने के कारण नहीं पढ़ पाये होंगे, पढ़ लीजियेगा, इस में आपके सारी प्रश्नों का तरतीबवार जबाब है.

और हां, एम्बेडेड जर्नलिज़्म अमेरिका की इज़ाद नहीं हैं, अपने खुद के देश में जर्नलिस्ट स्पान्सर्ड विचार लोगों पर फैलाते आये हैं.

राजदीप सरदेसाई जैसे भी तो फिसल जाते हैं
आप भी फिसल पड़े हैं सो बोलते रहिये।

Monday, February 3, 2014

List of Indian freedom fighters who perished in struggle against British colonialism between 1883-1943

 630-03481385
This information is from a pamphlet by the Hindustan Socialist Republican Army, which was distributed throughout India in 1943. The purpose of re-publishing it here is that it the original site where it was published appears to have gone down, and I think it is worthwhile for this list to still exist on the web.

All of the individuals listed here were active participants in the freedom movement. They were either executed or perished in jail. May their memories and love of Mother India live on.
** Numerous persons died in Jails in connection with Quit India movement whose names are not available.

1. Vasudev Balvant Phadke, Dist. Kolaba, Maharastra, Born Nov. 4, 1845. He tried toorganise a National revolt against theBritish: Deported to Aden and kept in Aden Jail under inhuman condition. He resorted to hunger strike as a protest against ill treatment of the Jail Authority and died on Feb. 17, 1883.

2-4. Senapati Tikendrajit Singh, Manipur. General Thengal, Manipur, Agnes Sena (Younger brother of General Thengal), Manipur. They revolted against British and were executed on August 13, 1891.

5. Damodar Hari Chapekar, Maharastra. Executed in Yerrowda Central Jail or, April 18, 1898 on a charge of killing Rand, Plague Co mmissioner and another army officer named Ayerest.

6-7. Basudeo Hari Chapekar, S/o Hari Chapekar, Maharastra and Mahadeo Ranade, S/o. Vinayak Ranade, Maharastra were executed in Yerrowda Central Jail on May 8, 1899 and May 10, 1899 respectively for murder of informer Dravids.

8. Balkrishna Chapekar. S/o HariChapekar. Maharastra. Executed in Yerrowda Central Jail on May 12, 1899. He helped in the plan to kill Mr. Rand, Plague Commissioner, Poona.

9. Khudiram Bose, S/o Trailokyanath, Midnapore (Born Dec. 3. 1889) was executed in Muzaffarpur Jail (Bihar) on August 11, 1908 for committing murder on Miss and Mrs. Kennedy mistaking that the carriage in which they were travelling was carriage of Session Judge Kingsford.

10. Kanailal Datt, S/o Chunilal. Chandannagar, Dist. Hooghly, West Bengal Executed in Old Alipore Jail Harinbari-present Presidency Jail) on Nov. 10, 1908 for shooting dead approver Narendra Goswami inside jail.

11. Satyendranath Bose. S/o Abheycharsn Midnapore, West Bengal. Exeouted in Old Alipore Jail (Harinbari–present Presidency Jail) an Nov. 21, 1908 for shooting dead approver Narendra Goswami inside jail.

12. Charu Charan Bose. S/o Keshablal, Khulna (now in Bangladesh) Executed on March 19, 1909 in Old Alipore Jail (Harinbari–present Presidency Jail) for shooting dead Ashu Biswas, Public Prosecutor of Alipore Bomb case inside Jorabagan Court premises.

13. Madanlal Dhingra. Punjab. He shot and killed William Curzon Wyllie, Political A.D.C. to the Secretary of State. He was executed on August 17, 1909 in Pentonville, London.

14. Birendranath Datta Gupta, S/o Umacharan, Dacca (now in Bangladesh). He shot dead D.S.P. Shamsul Alam in Calcutta High Court premises. Alam was the prime investigator in Alipore Conspiracy case..He was executed on Feb. 21, 1910 in Old Alipore Jail (Present Presidency Jail).

15-17. Aranta Laxman KanhereKrishna Gopal Kanre and Vinayak Narayan Deshpande. They were executed in Thane Jail (suburb of Bombay) on April 19,1910 for killing D.M. Jackson who convicted Ganesh Damodar Savarkar to transportation in Nasik Conspiracy case.

18 Kashiram, Executed in Ferozpore Jail, Punjab, on March 27, 1915 in connection with preparation for All India armed uprising.

19-22. Amirchand. S/o Hukumchand; Balmokand, S/o Bhai Mathuradas, Punjab: Abad Behari (Oudh) ; Basanta Biswas, S/o Motilal, Nadia, West Bengal. All the four were sentenced to death in Delhi Conspiracy case in which the principal accused Rashbehari Bose could not be arrested in spite of a reward being declared for his arrest. They were executed on May 11, 1915 in the Ambala Jail.

23-29. Bakshis SinghBishnu Ganesh PingleySurain Singh, S/o Ishar Singh; Surain Singh, S/o Burah Singh ; Harnam Singh of Sialkot ;Jaggat Singh and Kartar Singh, Saraba. These seven persons along with 17 others were sentenced to death in the 1st Lahore Conspiracy case set up after the failure of projected Ah India Armed Uprising for seizure of power on Feb. 21, 1915 under the leadership of Rashbehari Bose. They marched to gallows valiantly refusing to make any mercy petition to Govt. They were executed on Nov. 17, 1915 in Lahore Central Jail.

30-31. Niren Das Gupta. S/o Lalit Mohan, Faridpur (now in Bangladesh) and Monoranjan Sen Gupta. Faridpur (now in Bangladesh). These two were participants in the well known Balasore fight on Sept. 9, 1915 along with the illustrious revolutionary leader Jatindranath Mukherjee and on being arrested were prosecuted for murder of one Rajmahanty whom they had to kill in the morning of the same day in self-defence and were sentenced to death. They were executed on Nov. 22, 1915 in the Balasore Jail (Orissa).

32. Bhan Singh. A convict of Lahore Conspiracy case who was most brutally assaulted for alleged misbehaviour with the Superintendent of Andaman Cellular Jail. He died during hunger strike.

33. Sohanlal Pathak, Amritsar. He was tried and sentenced to death for his activity in connection with preparation for a soldiers’ uprising in Burma during the Ist World War. He was executed in January, 1916 in Mandalay Jail (Burma).

34-38. Her Singh Bahoowal. Hoshiarpur; Ishar Singh alias Suran Singh, Ferozepore; Ranga Singh alias Rods Singh. Jullundur; Rur Singh of Talwandi, Ferozepore and Uttam Singh, Ludhiana. They were sentenced to death in one of the supplementary Lahore Conspiracy cases following the failure of the projected countrywide armed uprising on Feb. 21, 1915. They were executed in Lahore Central Jail on June 12, 1916.

39-45. Harnam Singh
; Challiaram; Narain SinghBasswa SinghNarinjan SinghBhai Balbant Singh. They were executed in Burma, between August 19 & 22, 1916 in connection with Burma Conspiracy case.

46. Sushil Lahiry, Executed in Oct., 1918 in Beneras Jail CU.P.) for killing his intimate friend Binayak Rao Kapie whom the party had given death penalty for rank defection and misappropriation of money and arms.

47. Ram Rakha, Died during hunger strike in l919 in Andaman Cellular Jail.

48-66. Abdulla alias Sukhai; BhagwanBisramDudhaiAlicharanLal Mohammad; LaltuMahadeoMeghuNazir AliRaghubirRamlaganRamrupRudaliSahadeo;Sampat ISampat IIShyam SundarSitaram. They were arrested in connection with famous Chauri Chaura case during Non-co-operation movement led by Gandhiji and were executed in 1923.

67. Gopi Mohan Saha (Gopinath). S/o Bijoykrishna, Serampur,-Dist. Hooghly, West Bengal. Executed on March I, 1924 in Old Alipore present Presidency) Jail for shooting dead an Englishman Mr. Day mistaking him as Police Commissioner Tegart.

68-69. Ananta Hari Mitra, S/o. Ramlal (Born 1906) and Promode Ranjan Chowdhury, S/o Ishan (Born 1904). They were sentenced to death for killing D.I.B. officer Bhupen Chatterjee inside the jail where they were being then detained as under trial prisoners in akhbareswar Bomb case. Executed on Sept. 28, 1926 in Alipore Central Jail (New Central Jail).

70. Rajen Lahiri, S/o, Kshitish Mohan, Pabna (now in Bangladesh) Born June 1901. Executed on Dec. 17, 1927 in Gonda Jail (U.P.) in connection with Kakori Conspiracy case.

71. Asfsqullah Khan. Shahjahanpur ( U.P.). Executed in Faizabad Jail (U.P.) on December 19, 1927 in connection with Kakori Conspiracy case.

72. Ramprosad Bismil. S/o. Muralidhar Tewari, Shahjahanpur (U.P.). Born 1898. Executed on December 19, 1927 in Gorakhpur Jail (LT.P.) in connection with Kakori Conspiracy case.

73. Thakur Roshan Singh. S/o. Jagadish Singh, Shahjahanpur (U.P.). Born 1897. Executed in Naini Central Jail (U.P.) in connection with Kakori Conspiracy case on Dec. 21, 1927.

74. Jatindranath Das. S/o. Bankim Behari, Calcutta, West Bengal, Born Oct. 27, 1904. He along with ten others joined a hunger strike started by Bhagat Singh and Batukeswar Datta earlier upon a demand for recognition of better status for all political prisoners. He died inch by inch after 63 days of fasting on Sept. 13, 1929 in Lahore Brostal Jail.

75. Hpoongyi-U-Wizaya, Kyaungone, Bassein, Burma. He was a monk and resorted to hunger strike upon a demand for better diet for political prisoners and certain other privileges consistent with the life of a monk. Expired on September, 20, 1929 after fasting for 163 days.

76. Bhagat Singh. S/o Kishan Singh and nephew of renowned revolutionary Sardar Ajit Singh. Lgallpur (now in Pakistan). Born Oct. 6, 1907. He was first arrested for the well-known Central Assembly Bomb throwing affair and while in prison was made an accused in the Second Lahore Conspiracy case along with many others woven round the murder of Saunders, A.S.P., Lahore. He was executed on March 23, 1931 in Lahore Central Jail.

77-78. Sibram Rajguru, S/o Hari Narayan Rajguru, Poona, Maharastra, and Sukdeb, S/o Lala Ram Lal Thapar. Lyallpur (now in Pakistan). Born May 15, 1907. They were executed on March 23, 1931 in Lahore Central Jail in connection with Lahore Conspiracy Case.

79. Hari Kishan Talwar. S/o Lala Gurudasmal, Punjab. Born January, 1908. He made an attempt on the life of Geoffery-deMontmorrency. Governor of Punjab when the latter was coming out of the Lahore University Hall after delivering the convocation address with a revolver shot injuring the Governor and killing a Police Officer Channan Singh. He was executed on June 9, 1931 in Mianwali Jail (now in Pakistan).

80-82. Ranabir SinghDurga DasChamanlal. They were arrested in connection with Martyr Hari Kishan Talwar’s case and after a supplementary trial_were sentenced to death.

83. Dinesh Gupta. S/o Satish, Dacca (now in Bangladesh). Born Dec. 6, 1911. He was a participant along with Benoy and Badal in the historic Calcutta Writers Buildings raid (Dec. 8, 1930) when Col. Simpson, I.G. of Prisons, Bengal, was shot dead and Mr. Nelson, Judicial Secretary and some others were injured. He was executed in Alipore Central Jail (New Central Jail) on July 7, 1931.

84. Ram Krishna Biswas. S/o Durgakripa, Chittagong (now in Bangladesh). Born January 16, 1910. He shot dead Inspector Tarini Mukherjee at Chandpur, Comilla (now in Bangladesh) mistaking him as Craig, I.G. of Police. Executed on August 4, 1931 in Alipore Central Jail (New Central Jail).

85-91. NGA PothunNGA BogaukNGA Than MyaingNGA Po ThitNGA Po SaungNGA BaThaw and NGA Po Hta.These seven martyrs were tried by special tribunal (this trial is known as famous THARAWADDY trial) on a charge of organising revolt against the British Govt. They were condemned to death on August 8, 1931.

92-93. Tarakeswar Sengupta. S/o Haricharan, Barisal (now in Bangladesh). (Born April 15, 1905) and Santosh Mitra, Calcutta, West Bengal. They were killed in Hijli Detention Camp (Midnapore, West Bengal) on Sept. 16, 1931 in course of an attack on the detenus by Jamuna Singh, Head Warder and his subordinates.

94. Saya San. A hero of hundred battles rebelled against the British. He was executed in Burma on Nov. 18, 1931.

95. Manoranjan Bhattacharjee. S/o Kali Prasanna, was executed on August 22, 1932 in Barisal Jail (now in Bangladesh) in connection with Charanuguria (Faridpur–now in Bangladesh) Post Office dacoity case.

96. Ramdeni Singh. Bihar, was hanged in 1932 in connection with Hajipur Station dacoity case.

97. Pradyot Bhattacharjee
. S/o Bhabataran, Midnapore, West Bengal, was executed in Midnapore Central Jail on Jan. 12, 1933 in connection with Douglas (district Magistrate, Midnapore) murder case.

98. Kalipada Mukherjee was executed on Feb. 16, I933 in DaccaJail (now in Bangladesh) in connection with Kamakhya Sen, Special Magistrate murder case.

99. Mahabir Singh. S/o Kunwar Devi Singh, Etah District, CU.P.). Born Sept. 16, 1904 and died on May 17, 1933 in Andaman Cellular Jail in course of a hunger strike while resisting forced feeding.

100. Man Krishna Namadas (NZohan Kishore)· Mymensingh (now in Bangladesh), who resorted to hunger strike in Andaman Cellular Jail as a protest against inhuman treatment on political prisoners died on May 26, 1933 while resisting forced feeding.

101. Mohit Maitra. S/o Hem Chandra Maitra, Calcutta, West Bengal, Died on May 28, 1933 in Andaman Cellular Jail in course of hunger strike while resisting forced feeding.

102. Surya Sen (Mastetda). S/o Raj Mani Sen. Born March 22, 1894, Chittagong (now in Bangladesh), was executed in Chittagong Jail on Jan. 12, 1934 for armed uprising against the British in Chittagong; He was the Supreme Commander of the uprising.

103. Tarakeswar Dastidar. S/0. Chandra Mohan, Chittagong (now in Bangladesh) He was an active associate of Masterda Surya Sen during absconding period and was executed in Chittagong Jail., January 12, 1934 for armed revolt against the British in Chittagong.

104-105. Harendranath Chakraborty. S/o Kali Kumar, Chittagong (now in Bangladesh) and Krishna Chowdhury, S/o Hemendralal, Chittagong attempted to kill Europeans In Chittagong Paltan Maidan. They were executed on June 5, 1934 in Midnapore Central Jail.

106. Dinesh Majumdar, S/o Purna Chandra, Basirhat, 24-Parganas, West Bengal (Born May, 1907), shot dead Polios Commissioner Quinn of Chandannagore (French). Attempted on the life of Tegart, police Commissioner, Calcutta on 25.8.30 and being arrested for the latter event escaped from the Midnapore Central Jail and went under ground He was recaptured at Cornawallis Street, Galcutta, after a fight with the Police Party. He was executed on June 9, 1934 in Alipore Central Jail (New Central Jail).

107. Baikuntha Sukul (Sukla). S/o Ram Behari Sukul, Mazaffarpur, Bihar, was executed o, May 14, L934 in Gaya Jail (Bihar) for killing Phani Ghosh who betrayed the revolutionary party and turned approver in the Second Lahore Conspiracy case.

108. Manindranath Banerjee, S/o Dr. Taracharan Banerjee: Beneras (Born in 1911) died in Fatehgarh Jail CU.P.) on June 20, 1934 after 66 days’ Hunger Strike in protest against brutal treatment inside Jail. He was arrested for shooting Jiten Baneljee, S.P., who was in charge of investigation of Kakori Conspiracy case though the victim was his own maternal uncle.

109. Ashit Bhattacharjee.
 S/o Khirod Mohan, Lashiara, Dist. Comilla (now in Bangladesh) Born April 4, 1915 executed on July 2, 1934 in Sylhet Jail (now in Bangladesh) in connection with Itakhola mail dacoity case.

110-112. Ram Krishna Roy
, S/o Kenaram Ray Roy Midnapur, West Bengal; Brojo Kishore Chakraborty and Nirmal Jiban Ghosh, S/o Jamini Jiban Ghosh, were executed in Midnapore Central Jail in connection with Burge (D· M· Midnapore) murder case. Ram Krishna Roy and Brojo Kishore Chakraborty were executed on Oct. 25, 1934 and NirmalJiban Ghosh on October 26, 1934.

113. Motilal Mallick. S/o Raj Kumar, Dacca (now in Bangladesh). Born 1912. Executed Dec. 15, 1934 in Dacca Jail in connection with Deobhog (Dacca) Shooting case.

114. Bhabani Bhattacherjee. S/o Basanta Kumar, Dacca (now in Bangladesh). Born 1914. Tried in connection with the attack on the life of Sir John Anderson, Governor of Bengal, at Lebong race course, Darjeeling and was sentenced to death. He was executed on February 3, 1935 in Rajshahi Jail (now in Bangladesh).

115. Rohini Barua. Born 1915. Executed in Faridpur Jail (now in Bangladesh) on Dec. 18, 1935 on a charge of beheading a sub-Inspector of Police named Ersad Ali of Gopalganj P.S., Faridpur.

116. Haren Munshi, Died on Jan 30, 1938 in Dacca Jail (now in Bangladesh) while resisting forced-feeding in course of a hunger strike resorted to by repatriated Andaman prisoners convicted in Titagar Conspiracy case.

117. Udham Singh. S/o Sardar Tahel Singh, Sunam, Patiala, Born Dec. 26, 1898. He shot dead Michel O. Dyer, ex-Governor of Punjab as a reprisal for the brutal atrocities led by him in Punjab in 1919. He was executed on June 12, 1940 in Pentonville Jail (London).

118. Sankar Mahali. was executed in Nagpur Central Jail on Jan. 19, 1943 in connection with Quit India movement.

119. Himu Kalani. a valiant fighter of the Quit India movement was executed in Sukkur Jail on Jan. 21, 1943.

120. Rajnarain Missir. the renowned Hero of the Quit India movement was executed in Lucknow Jail (U.P.).

121. Kusal Kanowar. Executed in Jorhat Jail, Assam on June 16, 1943 in connection with Quit India movement

Monday, July 1, 2013

RAVINDRA PATIL: THE DEATH OF A MESSENGER





In India, the testimony of the prime witness is considered the most important document in a criminal case, which often influences the final verdict.

In the 2002 hit-and-run case of Salman Khan, the man who found himself in the epicenter of the controversy, was the prime witness of the case — constable Ravindra Patil.

Those close to Patil admitted that he was under enormous pressure to change his statement.

There were many who wanted Patil to change his statement. They preferred that Patil maintain that Salman leaned back to listen to him seconds before he lost control of the wheel. This would mean that the accident was caused by a ‘human error’ and not because he was drunk.  Some people wanted him to say that Salman was not drunk at the time of the accident.

Whatever be the case, Patil did not change his statement till the last day.

It was unclear who was putting pressure on Patil — some say they were all ‘well-wishers’ of Salman Khan from the police force while others say that those talking to Patil were Salman’s common friends from the film industry. Whoever they were, the pressure tactic seemed to be working as Patil was showing signs of a nervous break-down.

Why was Ravindra Patil so vulnerable?

Patil was a constable and hence belonged to the lowest rung in the police force. He admitted numerous times that he was under pressure and he would always try to duck the media.

During 2006, when the examination of witnesses was on, Salman had hired the best lawyers in Mumbai who were all charged up to cross-examine Patil. But then, something unexpected happened. Patil just ran away one evening. His brother lodged a missing report about Patil at a local police station.

Day after day, Patil chose to skip court dates because he didn’t want to face the defence lawyer. Soon, Patil came under scrutiny of the court because he remained absent at the court hearings. The court proceedings were stuck because Patil was absent in the witness-box. It also came to light that he had run away without applying for leave.

In a strange twist of fate, a man who had actually lodged the first information report against Salman Khan now had an arrest warrant issued against him for not turning up at court hearings. The arrest warrant was issued after he failed to appear for five consecutive court dates.

As the judge ordered that he be arrested and produced in court, his seniors at the police force simultaneously approved that Patil be sacked from his job because he was absent from duty. His seniors chose to ignore the fact that technically Patil was ‘missing’ and not ‘absent’ according to their own records.

Nobody was interested in knowing why he had run away from his house. Or, why the same person who was so forthcoming in lodging a complaint against a Bollywood star like Salman Khan, didn’t want to take the witness-box. Patil was never put under any witness protection programme.

Patil was sent to Arthur Road jail with hardened criminals

Like how they deal with a hardened criminal, a task force was prepared to nab Patil and find out where he was ‘hiding’. Finding him was easier than anybody had thought because Patil was not hiding anywhere. Ravindra Patil was actually staying in a small hotel in Mahabaleswar, just a few kilometres away from Mumbai. He would come to Mumbai often to meet his wife and family. He was not on the run from the police and was going around telling everybody that he wanted to stay away from the Salman Khan case.

He had repeatedly requested his colleagues in Mumbai Police to work out a way so that he can be spared from the case. The problem was: He was the prime witness and without him the case didn’t stand a chance in a court of law.

How many of you hate going to court? How many of you don’t like how witnesses are grilled in criminal cases by defence lawyers? Well, if I go by Patil’s example, then all of you should be put in jail. Believe it or not, Ravindra Patil was sent to jail because of this ‘crime’.

The special police team swooped down on him, arrested him and produced at the court, the next day. The court sent him to Arthur Road jail, the  biggest jail of Mumbai where most of the high-profile criminals are lodged.

Here are pictures after Patil’s arrest post a raid at a Mahabaleshwar hotel.

In Arthur Road jail, Ravindra Patil was incarcerated in a separate cell like they would treat an armed dacoit or a serial killer. Patil submitted fervent pleas that he doesn’t want to be grouped with criminals at the Arthur Road jail but the court was in no mood to relent.

Twice, Patil filed applications saying that he is a witness and that he be held at Unit nine of the Crime Branch and twice the court ignored the application. In his applications, Patil went on record saying that he went absconding as he was mentally disturbed at the thought of being cross-examined by defence lawyers. But nobody seemed to be interested in what he was saying.

If the courts didn’t pay heed to his pleas, his employers — the Mumbai Police — seemed to be on some revenge spree. A ‘missing’ Patil suddenly became an ‘absconding’ Patil in their own files and subsequently sacked from his job. This junior-most employee in the force tried every trick in the book to convince his senior officers that he should not be sacked from his job. But nobody was ready to listen.

A witness was suddenly at the receiving end of it all. Life was dealing this grand witness blows after blows while Salman Khan delivered hits after hits at the box office.

The last days of Ravindra Patil

After Patil was let out of jail, he found himself in a strange situation — his family had disowned him and the Mumbai Police was not ready to take him back. Patil didn’t know what to do — suddenly he was the victim because he saw the accident and spoke about it.

A broken man by then, Ravindra Patil went missing again.

Patil was finally discovered at the Sewri Municipal hospital in 2007. Patil was begging on the streets of Mumbai before he landed up at the hospital. The years of acute stress coupled with heavy drinking had made his body weak. Worse, he had contracted a drug-resistant tuberculosis which fast tracked him towards an inevitable end.

Patil wanted to get back in the police force but he was just a bag of bones lying on bed number 189 of ward number four on the fourth-floor of Sewri TB Municipal Hospital. His family members were not aware where he was and nobody had come to see him for a year.

Here are some moving pictures of Ravindra Patil, just days before his death.




Constable Ravindra Patil died on October 4, 2007.

Even after his death, there was nobody to take back his body. The friend who had admitted him to the hospital was so scared that he didn’t even inform his family. In the end, his brothers came forward to perform the last rites.

Before his death, Patil spoke to his friend expressing his wish to get back to the force again while throwing up blood on the cold floors of the Sewri Municipal hospital.

“I stood by my statement till the end, but my department did not stand by me. I want my job back, I want to survive. I want to meet the police commissioner once,” were his last words.

Clearly, even God chose not to hear him.

Ravindra Patil never rested in peace.

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Constable Ravindra Patil’s eye-witness accounts are still the most important documents in the2002 Hit-and-Run case involving Salman Khan. It is now a case of homicide after a thorough re-examination of other witnesses.

Salman Khan faces a 10-year jail term in the case if he’s convicted.

Before we end, here is a news report about Patil after he was discovered just days before his death.

Saturday, April 27, 2013

चिटफंड घोटाले की चपेट में चिदम्बरम की पत्नी

 

नयी दिल्ली, पश्चिम बंगाल में हुए 20 हजार करोड़ रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले में केन्द्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम का नाम भी उछल रहा है। उल्लेखनीय है कि सुदीप्तो ने सीबीआई को एक पत्र लिखा है। 18 पेज की इस चिट्ठी में सुदीप्तो ने तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों, वकीलों और पत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग के सात ही अन्य आरोप भी लगाये हैं। हालांकि नलिनी चिदंबरम से जुड़े सूत्रों का दावा है कि नलिनी ने कभी भी सुदीप्तो के लिये काम नहीं किया। इस बीच, अदालत ने सुदीप्तो को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर दे दिया है। सुदीप्तो ने लिखा है कि मनोरंजना सिंह और मतंग सिंह ने मुझे नुकसान पहुंचाया है। उल्लेखनीय है कि मतंग सिंह नरसिंह राव सरकार में मंत्री थे और मनोरंजना उनकी पत्नी हैं। चिट्ठी के मुताबिक मनोरंजना ने हमसे (सुदीप्तो से) संपर्क किया और अपने पॉजिटिव ग्रुप की बिक्री के लिए वकील नलिनी चिदंबरम के पास ले गयीं। नलिनी ने मुझसे कहा कि मैं नॉर्थ-ईस्ट गुवाहाटी में एक चैनल स्थापित करने में उनकी मदद करूं। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में किसी भी विवाद का निपटारा करेंगी। सुदीप्तो के मुताबिक नलिनी ने मुझे 42 करोड़ रुपये चैनल के लिये देने को कहा था। जहां तक मुझे याद है मैंने अब तक मनोरंजना सिंह को जीएनएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड व एनके गुप्ता को उनके पिता के नाम पर 25 करोड़ रुपये दिये हैं। दूसरी ओर सरकार ने एसएफआईओ को चिटफंड कंपनियों की जांच का आदेश दिया, कंपनियों में प्रवर्तकों द्वारा सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की पड़ताल के लिए विशेष कार्यबल बनाया। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री सचिन पायलट मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आज एक बैठक की जिसमें शारदा समूह की कंपनियों समेत विभिन्न चिटफंडों की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चिटफंड घोटाले का खुलासा होने के कारण मंत्रालय द्वारा शारदा समूह की कंपनियों की जांच करायी जा सकती है।

स्रोत - http://ranchiexpress.com/224393


उछला चिदम्बरम की पत्नी का नाम  
कोलकाता। सारधा समूह के चेयरमैन सुदीप्त सेन के बाद चिटफंड घोटाले में बुरी तरह फंसी तृणमूल कांग्रेस ने भी केन्द्रीय वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम की पत्नी नलिनी चिदम्बरम की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। सीबीआई को दिए गए अपने पत्र में सुदीप्त सेन ने तृणमूल सांसद कुणाल घोष और सृंजय बोस समेत दूसरे लोगों पर सुरक्षा देने के नाम पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। इसमें नॉर्थ-ईस्ट टेलीविजन चैनल व पॉजिटिव ग्रुप के मतांग सिंह, उनकी पत्नी मनोरंजना सिंह और नलिनी चिदम्बरम भी शुमार हैं। सेन का आरोप है कि नलिनी चिदम्बरम ने मनोरंजना के मीडिया समूह में निवेश करने के लिए दबाव डाला था।

तृणमूल सांसद बोस और घोष ने इस घोटाले में खुद के लिप्त होने इनकार कर दिया और नलिनी चिदम्बरम की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है।

वेबसाइट में उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी वेबसाइट पर सारधा समूह के घोटाले का सौदा चेन्नई की एक महिला वकील ने क्यों कराया शीर्षक से लेख प्रकाशित किया है। लेख में तृणमूल कांग्रेस ने सवाल किया है कि चेन्नई की एक महिला वकील और कांग्रेस के एक केन्द्रीय मंत्री की पत्नी ने इस घोटाले में सौदा सुनिश्चित कराने में क्यों भूमिका निभाई। इसका केन्द्रीय मंत्री को अवश्य स्पष्टीकरण देना होगा। तृणमूल कांग्रेस ने केन्द्रीय वित्तमंत्री की ओर इशारा किया है। तृणमूल ने यह भी सवाल किया है कि करारनामा तैयार करने के लिए महिला वकील को एक करोड़ जैसी भारी भरकम रकम क्यों दी गई। तृणमूल कांग्रेस ने तीसरा सवाल पूछा है कि काम चेन्नई के वकील को क्यों सौपा गया है, जबकि दिल्ली और गुवाहाटी में बहुत से अच्छे वकील हैं।

उधर, नलिनी चिदम्बरम ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके करीबी सूत्रों ने कहा कि नलिनी चिदम्बरम ने नॉर्थ ईस्ट टेलीविजन समूह में निवेश करने के लिए सुदीप्त सेन पर कभी भी दबाव नहीं डाला। 

स्रोत: http://www.patrika.com/news.aspx?id=1035657

चिटफंड घोटाले की आग वित्तमंत्री चिदम्बरम के घर तक पहुंची

नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल में हाल ही सामने आए 20 हजार करोड़ के शारदा चिटफंड घोटाले की आग वित्त मंत्री पी चिदंबरम के घर तक पहुंचती नजर आ रही है। शारधा ग्रुप के प्रमोटर सुदिप्ता सेन की सीबीआई को लिखी गई 18 पेज की चिट्ठी ने नया बवाल खड़ कर दिया है।

खबरों के मुताबिक सुदिप्तो ने इस चिट्ठी में पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम पर उंगली उठाते हुए कहा है कि नॉर्थ इस्ट में टीवी चैनल की डील में नलिनी ने वकील की भूमिका अदा की थी। पत्र में यह साफ लिखा गया है कि नलिनी चिदंबरम, सुदिप्ता सेन और मतंग सिंह व उसकी पत्नी मनोरंजन सिंह के बीच चैनल को खरीदने की डील में वकील थीं। नलिनी चिदंबरम कंपनी लॉ बोर्ड में एम/4 पॉजिटिव टीवी लिमिटेड के खिलाफ दायर किए गए केस में मनोरंजन सिंह और नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान मंत्री रहे मतंग सिंह के लिए वरिष्ठ वकील की भूमिका भी अदा कर रही थीं। यह केस अभी भी कंपनी लॉ बोर्ड में लंबित है।
नलिनी के करीबियों के मुताबिक नलिनी ने न सिर्फ मनोरंजन का केस पेश किया था, बल्कि प्रोफेशनल कैपेसिटी के तहत मनोरंजन को सलाह भी दी थी और शारधा ग्रुप ऑफ कंपनीज ने मनोरंजन की कंपनी में निवेश करने का प्रस्ताव दिया था। वहीं तृणमूल कांग्रेस अब संसद में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है कि सेन के पत्र में जिन कांग्रेस मंत्रियों के नाम थे उनसे पूछताछ क्यों नहीं की गई।
इस पत्र में सेन ने कहा है कि टीवी चैनल की डील करने के लिए टीएमसी के सांसद कुणाल घोष और सृन्जॉय बोस ने उन पर दबाव डाला। इस पत्र में टीएमसी नेताओं, वकीलों और पत्रकारों सहित कई नामचीन हस्तियों के नाम हैं, जिन पर पैसा मांगने, ब्लैकमेलिंग और कई अन्य आरोप लगाए गए हैं।

स्रोत - http://newsflashrajasthan.com/chit-fund-scams-fire-reached-minister-chidambaram/

 



Thursday, July 26, 2012

नरेन्द्र मोदी से नई दुनिया के संपादक शाहिद सिद्दीकी का इंटरव्यू


शाहिद सिद्दीकी: नरेन्द्र मोदी जी, हिंदुस्तान का आपकी कल्पना क्या है? क्या आप हिंदुस्तान को एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं? अगले पचास वर्षों में आप कैसा हिंदुस्तान बनाना चाहते हैं? 
नरेन्द्र मोदी: हम एक खुशहाल भारत देखना चाहते हैं। एक मजबूत भारत देखना चाहते हैं। 21वीं सदी भारत की सदी हो यह हमारा स्वप्न है। जिसे साकार करना है। 


सिद्दीकी: कहा जाता है कि आप गुजरात को हिंदू राष्ट्र की प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आप केंद्र में सत्तारूढ़ हो गए तो आप भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाना चाहेंगे। इसमें मुसलमानों और दूसरी अल्पसंख्यकों की कैसी जगह होगी?
मोदी: पहली बात तो यह है कि आज गुजरात में अल्पसंख्यकों की जो जगह है वह पूरे देश की तुलना में ज्यादा अच्छी है। और दूसरे बेहतर होने की गुंजाइश इतनी ही है जितनी किसी हिंदू की। मुसलमान को भी आगे बढ़ने का उतना ही मौका मिलना चाहिए। जितना किसी हिंदू को। अगर तशब हो तो एक घर भी नहीं चल सकता। एक बहु अच्छी लगे और दूसरी न लगे तो घर में सुकून नहीं हो सकता। 

सिद्दीकी: मान लीजिए की घर में चार बच्चे हैं। इनमें से एक किसी भी वजह से कमजोर है, पिछड़ गया है तो क्या उसपर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए? उसे बढ़ने के लिए अधिक अवसर नहीं मिलने चाहिए? 
मोदी: यह तो हमारे संविधान में भी कहा है कि जो कमजोर है, पिछड़ा है, उसे अलग से सहारा मिलना चाहिए। अगर समाज इसकी जिम्मेवारी नहीं उठाएगा तो भला कौन उठाएगा? मान लीजिए कि एक बच्चा
मानसिक रूप से कमजोर है इसके मां-बाप की जिंदगी तो उसे पालने में खप गई। मेरा मानना है कि अगर कमजोर बच्चा है तो उसकी जिम्मेवारी सिर्फ माता-पिता की नहीं बल्कि पूरे समाज की है। अगर हम यह कहें कि यह तुम्हारे घर में पैदा हुआ है सिर्फ तुम इसे संभाल लो तो गलत होगा। 

आरक्षण
सिद्दीकी: इस मुल्क में जितने भी सर्वे हुए हैं। चाहे वह सच्चर कमेटी हो या रंगनाथ मशि्र कमीशन। सबका कहना है कि खासतौर से मुसलमान जीवन के हर क्षेत्र में चाहे वह शिक्षा हो या आर्थिक बहुत से कारणों से पिछड़ गए हैं। आपके विचार में उन्हें आगे लाने के लिए, उनका हक दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए? क्या उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए? जबकि 50 फिसदी नौकरियां आरक्षण में चली गई हैं। बाकी 50 प्रतशित में मुसलमान मुकाबले में पीछे रह जाता है। उसके लिए सभी दरवाजे बंद हैं। उसको आगे लाने के लिए क्या करना चाहिए? 
मोदी: ऐसा नहीं है। गुजरात में ओबीसी में 36 मुस्लिम बिरादरियां हैं जो पिछड़ों में आती हैं। उन्हें वे सभी सुविधाएं मिलती हैं जो दूसरे पिछड़ों को मिलती हैं। मैं भी पिछड़ी जाती से हूं। हमें रास्ता ढूंढना होगा कि 3 सबको इसमें हिस्सेदारी मिले। जैसे आज स्कूल हैं, टीचर हैं। इसके बावजूद लोग अनपढ़ हैं। इसका हल हमने गुजरात में ढूंढा। हमने यह अभियान चलाया कि शत प्रतशित लड़कियों को शिक्षा मिले। जून के महीने में जब बहुत गर्मी होती है तो सारे अधिकारी, सारे मंत्री, सारी सरकार गांव-गांव और घर-घर जाते हैं। ये देखते हैं कि क्या लड़कियां पढ़ रही हैं आज  99 प्रतशित लड़कियां स्कूलों में हैं। इनमें सभी धर्मों की लड़कियां हैं। पहले ड्राँप आउट 40 प्रतशित था। आज वह मुि’कल से 2 प्रतशित ही रह गया है। अब इसका फायदा किसको मिल रहा है? मेरी हिंदू मुसलमान की फिलाँस्फी नहीं है। मैं तो सिर्फ यह देखता हूं कि गुजरात में रहने वाले हर बच्चे को हक मिले। मेरी दस साल की कोशिशों में सबसे खूशी इस बात की है कि मैं किसी हिंदू स्कूल में अभिभावकों की बैठक बुलाता हूं तो उसमें साठ प्रतशित आते हैं। जबकि मुसलमान क्षेत्रों की बैठकों में शत-प्रतशित लोग आते हैं। 
मुसलमान ज्यादा जाग रहे हैं

सिद्दीकी: आपने मुसलमानों के इलाकों के स्कूलों में जाकर ऐसी मिटिंगें की है।
मोदी: बिल्कुल, ढेर सारी। बल्कि मेरा तजुर्बा यह है कि आज शिक्षा के बारे में मुसलमान ज्यादा जागे हुए हैं। अभी मैं आपको बताऊं कि दान्ता के पास एक गांव में मैं गया। वह 70 प्रतशित मुस्लिम आबादी का था। वहां तीन बच्चियों ने मुझसे कहा कि उन्हें मुझसे अलग से बात करनी है। मुझे नहीं पता था कि वे किस धर्म से हैं। बच्चियां सातवीं-आठवीं कक्षा की थीं। मैंने जब उनसे अलग बात की तो यह पता चला कि वे तीनों मुसलमान हैं। उनका कहना था कि वे आगे पढ़ना चाहती हैं मगर उनके माता-पिता इसके खिलाफ हैं। उनकी इस बात ने मेरे दिल को छुआ कि मेरे राज्य में तीन लड़कियां ऐसी हैं जो आगे कि शिक्षा  प्राप्त करने  के  लिए  मुख्यमंत्री  से  मदद  मांगने  से  हिचक नहीं  रही  हैं।  मैंने  इनके  मां-बाप  को कहलवाया कि वे लड़कियों की बात मानें। यह दो साल पहले की बात है। दोनों लड़कियां पढ़ रही हैं। 

सिद्दीकी: आप ठीक कहते हैं कि पिछड़ों में मुसलमानों को हिस्सा तो दिया गया मगर मंडल के आने के बाद से पिछले 20 वर्षों में यह बात सामने आई हैं कि मुसलमानों को उनका हक नहीं मिलता। मशिाल के तौर पर दस नौकरियां हैं और अप्लाई करनेवाले पांच सौ हैं। इनमें 50 प्रतशित मुसलमानों ने भी अप्लाई किया है। मगर सभी नौकरियां हिंदू पिछड़ों को दी जाती हैं। मुसलमानों को कुछ नहीं मिलता। इसलिए सच्चर कमेटी ने इस बात पर जोर दिया कि पिछड़ों को आरक्षण में से मुसलमानों का अलग हिस्सा होना चाहिए। 
मोदी: भारत के संविधान निर्माताओं ने इस बात पर बहुत गहराई से विचार किया था और यह फैसला किया था कि धर्म के आधार पर कोई आरक्षण नहीं दिया जाएगा। यह खतरनाक होगा। उस वक्त तो कोई आरएसएस वाले या बजरंग दल वाले नहीं थे। 

सिद्दीकी: मुस्लिम लीडरों ने और यहां तक मौलाना आजाद तक ने धर्म के आधार पर आरक्षण का विरोध किया था। पिछले 64 वर्षों के अनुभव से हमें भी तो सिखना चाहिए। संविधान में हमने बहुत से संशोधन किए हैं। इसलिए अब 64 वर्ष बाद यदि हम मुसलमानों को उनका पिछड़ापन दूर करने के लिए आरक्षण देते हैं तो उसमें आपको क्या परेशानी है। 
मोदी: नहीं, नहीं, वह यह बदलाव नहीं है। यह एक बुनियादी बात है। संविधान के बुनियादी ढांचे में कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। मगर मैं दूसरी बात कहता हूं कि जिन राज्यों को आप प्रगतशिील और सेकुलर 4 कहते हैं वहां मुसलमान नौकरियों में दो प्रतशित हैं, चार प्रतशित हैं। गुजरात में मुसलमानों का आबादी में
अनुपात 9 प्रतशित है। मगर नौकरियों में 12 से तेरह प्रतशित हैं। बंगाल में 25 प्रतशित मुसलमान हैं। मगर नौकरियों में 2 प्रतशित हैं। यह मैं नहीं कह रहा। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट कह रही है। 

सिद्दीकी: गुजरात में तो मुसलमान पहले से ही आगे था। आपने कोई ऐसा कारनामा नहीं दिखाया है। मुसलमान बिजनेस में भी आगे था और तालीम में भी आगे था।
मोदी: चलिए आपकी बात मान लें। पिछले 20 सालों से गुजरात में बीजेपी की हुकूमत है। अगर हम उन्हें बर्बाद कर रहे होते तो क्या आज भी इतने ही आगे होते। अगर हमारा रूख मुस्लिम विरोधी था तो वे क्या 20 सालों में पिछड़ न जाते? सच्चर कमेटी का सर्वे उस वक्त हुआ जब मेरी सरकार थी। गुजरात में 85 से 95 तक सरकारी नौकरियों में भर्ती बंद थी। भर्ती तो मेरे जमाने में हुई। कुल छह लाख सरकारी नौकरियों में से तीन लाख मेरे समय में भर्ती किए गए। 

सिद्दीकी: आपके समय में जो भर्ती हुई उसमें 10 से 12 प्रतशित मुसलमान थे। 
मोदी: नहीं मैंने हिसाब नहीं लगाया है। यह मेरी फिलाँसफी नहीं है। न हीं मैं हिंदू मुसलमान के बुनियाद पर हिसाब लगाऊँगा। मेरा काम है कि मेरिट के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सबको मौका दिया जाए। अगर वे मुस्लिम हैं तो भी मिले। अगर वे हिंदू और पारसी हैं तो भी उन्हें मिलेगा। आप सच्चर कमेटी की हर बात पर वि’वास करते हैं। फिर सच्चर कमेटी ने मेरे वक्त की जो रिपोर्ट दी है। उसपर भरोसा क्यों नहीं करते?
दंगों में क्या हुआ?

सिद्दीकी: अब हम गुजरात दंगों की तरफ आएं। इस दौरान क्या हुआ। गोधरा में जो लोग जले उनकी लाशों को अहमदाबाद क्यों लाया गया। क्या आपको अंदाजा नहीं था कि इसके नतीजे क्या होंगे? 
मोदी: इस सवाल का जवाब विस्तृत रूप से मैंने एसआईटी को भी दिया है और सुर्पीम कोर्ट को भी कोई भी लाश होगी तो उसे वापस तो करना ही होगा। जहां सबसे ज्यादा तनाव है वहां कोई लाश ले जा सकता है? तनाव गोधरा में था। इसलिए वहां से जली हुई लाशों को हटाना जरूरी था। ये पैसेंजर कहां जा रहे थे? यह टेªन अहमदबादा जा रही थी। इन लाशों को लेने वाले सब अहमदाबाद में ही थे। आपके पास लाशों को वापस करने का क्या तरीका है? 

सिद्दीकी: आप किसी अस्पताल में लाकर खामोशी से उन्हें रि’तेदारों के हवाले कर देते। उन्हें घुमाया क्यों गया?
मोदी: आप सच्चाई सुन लीजिए। इतनी लाशों को रखने के लिए गोधरा में जगह नहीं थी। लाशों को वहां से हटाना था। प्रशासन ने सोचा की रात के अंधेरे में लाशें हटाई जाएं। इसीलिए उन्हें उसी रात वहां से हटाया गया। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में ला सकते थे। मगर वह भीड़भाड़ वाला इलाका था। तनाव पैदा होता। यह प्रशासन की समझदारी थी कि सभी लाशों को शोला के अस्पताल में लाया गया। शोला बिल्कुल उस वक्त अहमदाबाद से बाहर था, जंगल था। शोला से कोई जुलूस नहीं निकला। लाशें खामोशी से रि’तेदारों के हवाले कर दी गईं। 13 या 14 ऐसी लाशें थीं जिनकी पहचान नहीं हो सकीं। उनका अंतिम संस्कार भी अस्पताल के पीछे ही कर दिया गया।  5

दंगे क्यों नहीं रूके
सिद्दीकी: इसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे। लोग मारे जा रहे थे। घर जलाए जा रहे थे। आप गुजरात के मुख्यमंत्री थे। आपको तो खबर थी कि क्या हो रहा है। अहमदाबाद में क्या हो रहा है। आपने इस खून-खराबे को रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
मोदी: इसके लिए सबसे पहले काम हमलोगों ने यह किया कि शांति और अमन बनाए रखने की अपील की। यह मैने गोधरा से ही किया। इसके बाद अहमदाबाद आकर शाम को रेडियो टीवी से अपील की। मैंने प्रशासन से कहा कि जितनी पुलिस है सबको लगा दो। हालांकि यह बहुत बड़ा वाकया था। पहले ऐसा नहीं हुआ। एक वह वक्त था जब पहले कोई वाकया होता था तो दूसरे दिन अखबार में खबर आती थी। फोटो आने में भी दो दिन लग जाते थे। इतने में आव’यक कदम उठाने का मौका मिल जाता था। फोर्स भेजने का भी मौका मिल जाता था। आज टीवी पर घटना के चंद मिनटो बाद खबर आ जाती हैं। तस्वीरें दिखानी शुरू हो जाती हैं। प्रशासन को आज टीवी की स्पीड से मुकाबला करना पड़ता है। अहमदाबाद से बड़ौदा तो फोन चंद मिनटों में हो जाता है। मगर पुलिस फोर्स भेजनी हो तो कम से कम दो घंटे लगेंगे।
पुलिस फोर्स टीवी न्यूज की स्पीड की मुकाबला नहीं कर सकती। दूसरा मैं देश के अन्य भागों में हुए दंगों से तुलना करूं। मैं इस बात में वि’वास नहीं करता कि 1984 में दिल्ली में क्या हुआ? इसके लिए हमारे यहां हुआ तो क्या बात है? दंगा दंगा है। 1984 के दंगे में एक भी जगह गोली नहीं चली और न लाठी चार्ज हुआ। अगर लाठी चार्ज हुआ तो सिर्फ एक जगह हुआ। जहां इंदिरा गांधी की डेड बाँडी रखी हुई थी। वहां इतनी भीड़ जमा हो गई थी कि उसको कंट्रोल करने के लिए लाठी चार्ज हुआ। लेकिन दंगा रोकने के लिए पुलिस का इस्तेमाल नहीं हुआ। गुजरात में 27 फरवरी को गुजरात में कितनी जगह गोली चली, लाठी चार्ज हुआ, कफ्र्यू लगाया गया। कार्रवाई हुई।

हिंदुओं को खुली छूट 
सिद्दीकी: लेकिन आपकी पार्टी के लोग आपकी प्रशासन के अफ्सर यह कहते हैं कि आपने कहा कि हिंदुओं को 48 घंटे गुस्सा निकालने दो। हरेन पांड्या और संजीव भट्ट ने यह आरोप लगाया। आप इसके बारे में क्या कहते हैं?
मोदी: आपको किसी पर तो भरोसा करना होगा। मुझ पर नहीं तो सुर्पीम कोर्ट पर करें। सुर्पीम कोर्ट ने जांच करवाई। इसकी रिपोर्ट में क्या कहा गया। मैंने क्या कार्रवाई की। इसके बारे में मैं आपको पूरे तथ्य पेश कर रहा हूं। कहां-कहां गोली चली? कितने लोग मारे गए। आज तो मीडिया जागा हुआ है। कोई बात छुपती नहीं है। कोई झूठ चलता नहीं है। मैं एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताता हूं। मगर छापना मत (इसके बाद मोदी ने फौज के बुलाने के बारे में कुछ बातें कहीं मगर उन्हें प्रकाशित करने से मना कर दिया) एक और झूठ है। 27 फरवरी को गोधरा का वाकया हुआ। 28 को दंगे भड़के। 1 मार्च को फौज बुलाई गई। मीडिया के कुछ लोग कहते हैं कि तीन दिन तक फौज नहीं बुलाई। वे यह भूल जाते हैं कि फरवरी में 28 दिन ही होते हैं। यानी हमने अगले ही दिन अहमदाबाद को फौज के हवाले कर दिया था। गाली देने से पहले तो सोच लीजिए।  
दंगों की योजना पहले से ही थी

सिद्दीकी: मगर दंगे तो ऐसे हुए जैसे उनकी पहले से तैयारी थी। मुसलमानों के घर और दूकानों को चुन-चुनकर  जलाया  गया।  जैसे  पहले  से  ही  नशिान  लगाए  गए  थे।  पहले  से  ही  प्लान  तैयार  था। मुसलमानों की सूचियां बनी हुई थीं।
मोदी: यह सब झूठ है। प्राँपोगंडा है। उस वक्त की खबरें देखिए कि कितने मुसलमानों को बचाया गया है। अगर हम बचाने की कोशिश न करते तो कौन बचता? क्या-क्या कार्रवाई हुई इसका विवरण एसआईटी के पास है। 

सिद्दीकी: हिंदुस्तान के मुसलमानों के दिल में शक है, जख्म है। इसलिए लोग सच्चाई जानना चाहते हैं कि आपके मिनिस्टर पुलिस कंट्रोल रूम में मौजूद थे।
मोदी: झूठ, सरासर झूठ। तमाम सच्चाईयां एसआईटी के पास हैं। सुर्पीम कोर्ट ने जांच की है। उन्होंने क्या पाया इसका इंतजार करिए। मेरे कहने न कहने से फर्क नहीं पड़ता। 

सिद्दीकी: अहमदाबाद में जो दंगे हो रहे थे इसकी आपको पहले से ही खबर थी। क्या आपने शहर का राउंड लिया? रिफ्यूजी कैंपों में गए? 
 मोदी: मैं सब जगह गया। सबकी फिक्र की। यह प्राँपोगंडा फैलाया जाता है कि रिफ्यूजी कैंप सरकार ने नहीं चलाए। हमारे यहां गुजरात में सामाजिक ढांचा बहुत मजबूत है। जब भूचाल आया था तो भी हमने कैंप नहीं लगाए थे। हमने सारा इंतजाम अनाज, राशन आदि सामाजिक संगठनों के हवाले कर दिया था। इन शिविरों को चलाने वाले मुसलमान हो सकते हैं। मगर उनकी सारी जरूरतें सरकार पूरी कर रही थी।  इसका पूरा रिकाँर्ड है। कहां क्या दिया गया। कितना अनाज और दूसरी चीजें दी गईं? इतना ही नहीं दसवीं के इम्तेहान थे। इसका पूरा इंतजाम हमने किए। मुसलमान बच्चों ने इम्तेहान दिए और पास हुए। इसपर भी लोग अदालत गए मगर गलत साबित हुए। मगर कुछ लोगों ने और मीडिया ने मेरे खिलाफ झूठ फैलाने का ठेका ले रखा है। 

वाजपेयी ने क्या कहा? 
सिद्दीकी: उस वक्त अटल बिहारी बाजपेयी ने आपसे क्या कहा? उन्होंने आपसे कहा कि आपने राजधर्म नहीं निभाया। 
मोदी: यह झूठ चलाया जाता है। अटल जी ने जिस भाषण में कहा कि राजधर्म निभाना चाहिए। उसी में उन्होंने आगे कहा था कि मुझे मालूम है कि गुजरात में राजधर्म निभाया जाता है। इसी का अगला जुमला है। मगर मीडिया उसे गायब कर देता है। हालांकि उसका वीडिया रिकाँर्ड मौजूद है।

सिद्दीकी: आज दस वर्ष दंगे को हो गए हैं। आपसे अटल जी ने क्या कहा? दंगा रोकने के लिए क्या कदम उठाए? आपसे प्रधानमंत्री की क्या बात हुई? कुछ तो बताइए।
मोदी: उन्होंने कहा कि हम मिलजुलकर बेहतर करने की कोशिश करें और हालात पर काबू पाएं।  

फांसी पर लटका दो
सिद्दीकी: 1984 की दंगों की राजीव गांधी ने माफी मांगी, एचकेएल भगत, जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई। उनका राजनीतिक कैरियर खत्म हो गया। सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने भी माफी मांगी। फिर आखिर आपने 2002 के गुजरात दंगों पर माफी क्यों नहीं मांगी? अफसोस का इजहार क्यों नहीं किया? जबकि यह आपकी जिम्मेवारी थी।
मोदी: पहली बात उस वक्त मैंने क्या बयान दिए थे। उन्हें देख लीजिए। उस गर्मा-गर्मी के माहौल में मोदी ने क्या कहा? 2004 में मैंने एक इंटरव्यू में कहा था मुझे क्यों माफ करना चाहिए? अगर मेरी सरकार ने यह दंगे करवाए। तो उसे बीच चौराहे पर फांसी लगनी चाहिए। और ऐसी फांसी होनी चाहिए कि अगले सौ साल तक किसी शासक को ऐसा पाप करने की हिम्मत न हो। जो लोग माफ करने की बात कर रहे हैं वे पाप को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर मोदी ने गुनाह किया है तो उसे फांसी पर लटका दो। मगर अगर राजनीतिक कारणों से मोदी को गाली देनी है तो इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं है। 


सिद्दीकी: जो हुआ उसके लिए आपके दिल में कोई दुख है। हजारों लोग मरे इसके लिए आपको कोई अफसोस है? मैं एक अखबार का एडिटर हूं। अगर उसमें कोई गलत बात छपती है तो मैं माफी मांगता हूं। 
मोदी: आज माफी मांगने का क्या मतलब है। मैंने तो उसी वक्त जिम्मेवारी ली। अफसोस किया माफी मांगी। देखिए 2002 में दंगे के बाद क्या कहा? इसकी एक काँपी मुझे उन्होंने दी। आप यह तो लीखिए कि हम दस सालों से मोदी के साथ अन्याय कर रहे हैं। हमें माफी तो मोदी से मांगनी चाहिए।

इंसाफ क्यों नहीं मिला?
सिद्दीकी: चलिए दंगे हो गए। मगर इसके बाद क्या हुआ? मुसलमानों को आजतक इंसाफ नहीं मिला। आपके प्रशासन ने तो तभी सभी कातिलों को बरी कर दिया। जब तक सुर्पीम कोर्ट ने एसआईटी बनाकर आप पर सजा देने के लिए मजबूर नहीं किया। आपने कोई कदम नहीं उठाया।
मोदी: आप झूठे प्रचार का शिकार हो गए हैं।


सिद्दीकी: हम भी झूठ के शिकार हैं। पूरी दुनिया शिकार है। 
मोदी: एक स्वार्थी ग्रुप है वह शिकार है। जिस एसआईटी की आप बात कर रहे हैं उसने तो छह-सात मुकदमों की जांच की है। आपकी जानकारी के लिए गुजरात में तो हजारों एफआईआर दर्ज हुए। हजारों गिरफ्तार हुए। आज तक देश में जितने दंगे हुए। 1984 के दंगों में एक भी आदमी को सजा नहीं हुई। जबकि हमारे यहां 50 केसों में सजाएं हो चुकी हैं। आप जिन दो केसों की बात करते हैं वह गुजरात से बाहर ले गए। इनकी जांच किसने की? गुजरात पुलिस ने, गोवा कौन लाया? गुजरात पुलिस। चार्जशीट किसने बनाई? गुजरात पुलिस ने। हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। इस मामले को गुजरात से बाहर ले गए। वही कागज, वही गवाह, वही गुजरात पुलिस की जांच। महाराष्ट्र की अदालत ने सजा दी। कोई नई जांच तो नहीं की। आपने न्यायालय पर अवि’वास किया है। गुजरात पुलिस पर नहीं। बल्किस बानो केस की जांच गुजरात पुलिस ने की  और बाद में उसे सीबीआई के हवाले कर दिया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गुजरात पुलिस ने इस मामले में जिन्हें गिरफ्तार किया था। उन्हें सजा हुई। सीबीआई ने जिन्हें 8 गिरफ्तार किया था वे निर्दोष सिद्ध होकर बरी हुए। एक पुलिस वाले ने सीबीआई को कागज देने में देर की तो उसे सजा हुई। 

सिद्दीकी: पिछले दस सालों में गुजरात में मुसलमानों के फर्जी एनकाउंटर हुए। इनके केस चल रहे हैं। आपके पुलिस अधिकारी जेल में है। आपका प्रशासन....
मोदी ने बात काटते हुए कहा सुन लीजिए..सुन लीजिए..मायावती जी ने चुनाव से पहले अपने विज्ञापन में लिखा है कि हमने 393 एनकाउंटर करके शांति स्थापित की है। मेरे यहां तो सिर्फ 12 एनकाउंटर ही हुए। इनके मुकदमें चल रहे हैं। अभी किसी को सजा नहीं हुई है। ह्यूमन राइट्स कमीशन ने कहा है कि देश में जो एनकाउंटर हुए उनमें 400 फर्जी थे। सुर्पीम कोर्ट में अर्जी लगी है कि इन सबकी जांच होनी चाहिए। ऐसा क्यों नहीं हो रहा है। सिर्फ गुजरात के एनकाउंटरों की जांच हो रही है। देश के बाकी हिस्सों में होनेवाले एनकाउंटरों की जांच क्यों नहीं?

सिद्दीकी: ऐसा क्यों हो रहा है?
मोदी: क्योंकि गुजरात को नशिाना बनाया गया है। मुंबई में एनकाउंटर हो रहे हैं। मगर उनकी जांच नहीं हो रही। हर पार्टी गुजरात को बदनाम करने लगी है। वह ऐसा कर रही है। 

सिद्दीकी: क्या कांग्रेस ऐसा कर रही है? 
मोदी: जो भी पार्टी गुजरात को बदनाम करने में लगी है वह ऐसा कर रही है। मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता। 

मोदी तानाशाह है
सिद्दीकी: मगर आपकी अपनी पार्टी के लोग वि’व हिंदू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस के लोग यह इल्जाम लगाते हैं कि आप एक डिक्टेटर हैं। लोगों की जुबान बंद कर देते हैं। वे तो आपके विरोधी नहीं। आपके अपनी पार्टी के हैं। 
मोदी: मेरे पास कोई ऐसी जानकारी नहीं मगर फिर भी कोई ऐसा कहता है तो यह लोकतंत्र है। 
मोदी प्रधानमंत्री
सिद्दीकी:  कहा  जाता  है  कि  आप  देश  का  प्रधानमंत्री  बनने  की  तैयारी  कर  रहे  हैं।  आप  गुजरात  से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति की जिम्मेवारी संभालना चाहते हैं। अगर आप देश के प्रधानमंत्री बनें तो आपके क्या पांच महत्वपूर्ण काम होंगे।
मोदी: देखिए। मैं बुनियादी तौर पर संगठन का व्यक्ति हूं। कुछ खास परिस्थितियों में मैं मुख्यमंत्री बन गया। जिंदगी में मैं किसी स्कूल के माँनिटर का भी चुनाव नहीं लड़ा था। मैं कभी किसी का एलेक्शन एजेंट भी नहीं बना। मैं तो इस दुनिया का इंसान ही नहीं हूं। ना ही इस दुनिया से मेरा कुछ लेना देना रहा। आज मेरी मंजिल है छह करोड़ गुजराती। उनकी भलाई, उनका सुख। मैं अगर गुजरात में अच्छा काम करता हूं तो यूपी और बिहार के दस लोगों की नौकरी लगती है। मैं हिंदुस्तान की सेवा गुजरात के विकास द्वारा करूंगा। गुजरात में अगर नमक अच्छा पैदा होगा तो सारा देश गुजरात का नमक खाएगा। मैंने गुजरात का नमक खाया है और सारे देश को गुजरात का नमक खिलाता हूं।  9

मुसलमानों के लिए क्या किया?
सिद्दीकी: आखिर आपने गुजरात के मुसलमानों की भलाई के लिए कोई काम किया? 
मोदी: मैं हिंदू मुसलमान की सोच नहीं रखता। मैंने तो यह देखा है कि जो पिछड़ा हुआ है उसे आगे बढ़ाया जाए। समुंदर के तटीय क्षेत्र में मुसलमान ज्यादा हैं। हमने 1500 करोड़ का पैकेज दिया है। वहां हमने आईआईटी खोले हैं। स्कूल खोले हैं। मछुआरों के बच्चों को विमान चालन के बारे में बताया है। मछुआरों को छह महीने रोटी मिलती है। मैंने वहां पर सीवीड उगाने का काम किया है। ताकि मछुआरों को रोजी मिल सके। 

मोदी की पतंग
सिद्दीकी: अहमदाबाद में बहुत से इलाके दलितों और मुसलमानों के ऐसे हैं जो पिछड़े हैं। वहां बैंक नहीं हैं। अस्पताल नहीं हैं। 
मोदी: यहां शहरी समृद्धि योजना है। इसके तहत काम हो रहा है। कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही है। बैंक नहीं हैं। यह काम केंद्र का है। आपकी प्रिय कांग्रेस सरकार का काम है। गुजरात में पतंगबाजी बहुत बड़ा उद्योग है। इसे 99 प्रतशित मुसलमान चलाते हैं। मैंने इसका गहराई से अध्ययन किया है। मैं बोलना शुरू करूं तो आप भी पतंगबाजी पर मुझे पीएचडी की डिग्री दे देंगे। अहमदाबाद में जो पतंग बनती थी। वह 34 जगह जाती थीं। कही बांस बनता था तो कहीं गुंद, कही कागज। इससे काफी महंगा पड़ता था। मैंने रिसर्च करवाई। पहले यह पतंग उद्योग 8-9 करोड़ का था आज 50 करोड़ का है। पहले पतंग का कागज तीन रंगों का अलग-अलग लगता है। मैंने कागज वालों से कहा  कि वो एक ही कागज का तीन रंग का छाप दें। पतंग का बांस असम से आता है। मैंने रिसर्च करवाया अब गुजरात में ही बांस पैदा हो रहे हैं। आज हम सबसे ज्यादा चीनी वाला गणना पैदा कर रहे हैं। यह फायदा किसे मिला? आप कहेंगे मुसलमान को मिला। मैं कहुंगा मेरे गुजरातियों को मिला। 

मोदी का सेकुलरिज्म
सिद्दीकी: मोदी जी, क्या आप हिंदुस्तान को सेकुलर मुल्क बनाए रखना चाहेंगे। क्या आपका सेकुलरवाद में विश्वास है?
मोदी: जो लोग हिंदुस्तान को सेकुलरिज्म सिखा रहे हैं। वे अब देश की तौहीन कर रहे हैं। यह देश शुरू से ही सेकुलर है। भारत अफगानिस्तान का हिस्सा था तब भी वह सेकुलर था। पाकिस्तान में भी जब तक हिंदू थे। वह सेकुलर था। बांग्लादेश सेकुलर था। आप यह देखिए कि कौन सी पार्टी है जिसने देश से सेकुलरिज्म को खत्म किया? 

सिद्दीकी: आप एक शब्द इस्तेमाल करते हैं सोडो सेकुलरिज्म। इसका क्या मतलब है?
मोदी: सोडो सेकुलर वे होते हैं जो नाम के सेकुलर होते हैं काम के नहीं। जो उपदेश बड़े-बड़े देते हैं काम फिरकापरस्ती के करते हैं। अब हमारे यहां भाजपा के एक लीडर थे। शंकर सिंह वाघेला। आज वे कांग्रेस के बहुत बड़े सेकुलर लीडर बन गए हैं। आप में से कोई उनसे यह पूछे कि जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया तो उस वक्त वे कहां थे? वे किस स्टेज पर खड़े हुए थे? अब वे कांग्रेस में  शामिल हो गए तो सेकुलर हो गए। उनके सब पाप धूल गए। वे मुसलमानों से कहते हैं कि मुझे वोट दो। क्योंकि मैं मोदी से लड़ रहा हूं। हम इसको सेकुलरिज्म कहते हैं। 

अखंड भारत
सिद्दीकी: क्या आप फिर भारत को अखंड भारत बनाना चाहते हैं? क्या आपका यह स्वप्न है?
मोदी: मेरा स्वप्न है कि क’मीर से कन्या कुमारी तक भारत एक रहे, नेक रहें। सब सुखी रहें। सबका कल्याण हो। जो साम्राज्यवादी मनोवृत्ति के लोग हैं वे पाकिस्तान में अखंड भारत का आंदोलन चला रहे हैं। पाकिस्तान में आदोलन चल रहा है कि पाकिस्तान, हिंदुस्तान और बांग्लादेश एक हो जाएं ताकि यहां पर मुसलमान बहुसंख्यक हो जाएं। आजकल आपलोगों के भी मुंह में पानी आ रहा है।  इसलिए कि आप अखंड भारत के नाम पर मुस्लिम बहुल देश बनाना चाहते हैं। सब मुसलमानों को इकट्ठा करके हिंदुस्तानी मुसलमानों को आगे लाकर तनाव पैदा किया जाए। आपका भी यह सपना होगा।
सिद्दीकी: मेरा सपना तो संयुक्त हिंदुस्तान का था। मेरे पिता ने देश के विभाजन का विरोध किया था। पाकिस्तान बनने का विरोध किया था। हमारा स्वप्न तो पूरे उपमहाद्वीप में शांति स्थापित करने का है। 

हिंदू आतंकवाद
सिद्दीकी: गत दिनों आतंकवाद बढ़ा है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता मगर आज कुछ हिंदू भी आतंकवादी बने हैं तो इसका मुकाबला करने के लिए क्या कदम उठाएं।
मोदी: सख्त कानून बनाया जाए। 


सिद्दीकी: आपने तो सख्त कानून पोटा के तहत सिर्फ मुसलमानों को पकड़ा है। 
मोदी: हमने जिन्हें गिरफ्तार किया। इनके मामले सुर्पीम कोर्ट तक गए। मगर अदालत में एक भी केस गलत नहीं पाया। देश के दूसरे हिस्से में पोटा का गलत इस्तेमाल हुआ हो। मगर गुजरात में नहीं हुआ। हमारा पोटा लगाया हुआ एक भी केस झूठा नहीं निकला। जब यहां कांग्रेस की सरकार थी। इसमें हजारों लोग टाडा में गिरफ्तार हुए। उस वक्त भाजपा के अध्यक्ष मक्रांत देसाई थे। उन्होंने टाडा के खिलाफ कांफ्रेंस  की।  उन्होंने  दुनिया  को  दिखाया  कि  जिनलोगों  को  गिरफ्तार  किया  गया  उनमें  80  प्रतशित मुसलमान थे। 

सिद्दीकी: सिम्मी पर तो पाबंदी तो लगा दी गई। मगर आपलोग अभिनव भारत पर पाबंदी लगाने की मांग क्यों नहीं करते?
मोदी: अभी तक अभिनव भारत की संगठन की कोई तस्वीर सामने नहीं आई। इंडियन मुजाहिदीन की तस्वीर भी सामने नहीं आई। ये हैं क्या? उन्हे कौन चला रहा है? सरकार बताए। पहले पता लगे। तभी तो आप संगठन पर पाबंदी लगाएंगे। सिर्फ गुब्बारे छोड़ने से क्या फायदा। कांग्रेस कभी अभिनव भारत का गुब्बारा छोड़ती है और कभी इंडियन मुजाहिद्दीन का मगर सरकार के सामने न पूरी सच्चाई रखती है ना पूरी तस्वीर

सिद्दीकी: गुजरात के चुनाव नजदीक हैं। आप क्या समझते हैं आपके लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या है? 
मोदी: हम खुद ही अपने लिए सबसे बड़ा चैलेंज हैं। क्योंकि हमने स्तर इतना बुलंद कर लिया है कि लोग हमारे स्तर पर हमें नापते हैं। मोदी 16 घंटे काम करता है तो लोग कहते हैं कि अठारह घंटे क्यों नहीं? लोगों की आकांक्षाएं मोदी से बहुत ज्यादा है। इसलिए हमें अपने रिकाँर्ड  खुद ही तोड़ने पड़ते हैं।

मोदी के खिलाफ बगावत
सिद्दीकी: आज आपकी पार्टी के अंदर बगावत है। आपके खिलाफ चैलेंज है।
मोदी: यह मैंने जनता पर छोड़ दिया है। वह फैसला करे। मैंने पिछले दस वर्षों में हर चुनाव जीता है। मुझे उम्मीद है कि हम यह भी जीतेंगे।

सिद्दीकी: आप मुसलमानों को कोई संदेश देना चाहेंगे।
मोदी: भाई मैं बहुत छोटा इंसान हूं। मुझे किसी को संदेश देने का हक नहीं है। खादिम हूं। खिदमत करता रहूंगा। मैं अपने मुसलमान भाईयों से कहना चाहूंगा कि वे किसी के लिए सिर्फ एक वोट बनकर न रहें। आज हिंदुस्तान की राजनीति में मुसलमान को सिर्फ वोट बना दिया गया है। मुसलमान स्वप्न देखें। उनके स्वप्न उनके बच्चों के स्वप्न पूरे हों। वे वोटर रहें और अपने वोट का खुलकर इस्तेमाल करें। मगर उन्हें इसके आगे एक इंसान एक भारतीय के रूप में देखा जाए। उनकी तकलीफों को  समझा जाए। मैं अगर उनके किसी काम आ सकता हूं तो आउंगा। मगर उन्हें भी खुले दिमाग से देखना होगा। सोचना होगा।